मिलती अगर दोस्ती दूकान पर उधार में यारों,
बेइन्ताह ले लेता कभी ना चुकाने के लिए ।।
तुम्हे मौक़ा ना देता मैं रूठ जाने का एक पल भी,
गर रूठ जाते फना जिंदगी कर दूं मनाने के लिए ।।
जिस दिन ये आंखें बंद होगी बस इंतज़ार होगा,
कोई दोस्त कह दे हमेशा को सो जाने के लिए ।।
मुक्कदर से मिली है ये दोस्ती अ दोस्त तेरी,
लगती कम क्यों जिन्दगी अब जी जाने के लिए ।
खोल के सोते है दरवाजे घर के बाद-ए-दोस्ती,
आंखें खुली है तेरे दीद हो जाने के लिए ।
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Satyen Dadhich
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