हमेशा समझौता करना सीखिए..
क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना
किसी रिश्ते को हमेशा के लिए
तोड़ देने से बहुत बेहतर है।
सोच अच्छी है । सीख जो दी जा रही क्या वह सही है ।
झुक कर चलो, समझौता करो, सहयोग करो सही है लेकिन क्या यह सही है कि हर बार झुक कर चलो, समझौता करो, सहयोग करो और वो भी उस रिश्ते को निभाने के लिए जहाँ सारी रियायते छीन कर तुम्हे हिदायतों की एक लंबी लीक का रास्ता बता दिया जाता है... और तुम बस चलते रहो चलते रहो ।
यह रास्ता कहाँ और किस मंज़िल पर ले जाएगा यह तो पता नहीं पर रिश्तों को स्वयं के स्वाभिमान से भी ऊपर रखना क्या सही होता है ?
रिश्तों को निभाइये ना कि सिर्फ बनाये रखे ।